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कोरोना वायरस के कारण अब दुनियाभर में मंदी का खतरा बढ़ा, इस साल 0.9 फीसदी रह सकती है वैश्विक विकास दर
March 20, 2020 • Hardik Mehta

कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद क्रूड, शेयर व सोना-चांदी में गिरावट का झटका, उद्योग व कारोबार पर नकारात्मक असर व विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के राहत पैकेज का चरण पार करते हुए अब दुनिया एक गंभीर मंदी की तरफ बढ़ रही है। यह बात अमेरिका के दो दिग्गज निवेश बैंक व वित्तीय सेवा कंपनी मोर्गन स्टेनले व गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्रियों ने कही है। उनके मुताबिक इस साल वैश्विक विकास दर घटकर 0.9 फीसदी पर आ सकती है। आर्थिक तेजी की कोई भी संभावना यदि है, तो वह जून के बाद ही है।

आर्थिक तेजी की कोई भी संभावना जून के बाद ही

मोर्गन स्टेनले में अर्थशास्त्री चेततन आह्या और उनकी टीम ने कहा कि अब वैश्विक मंदी का खतरा मंडरा रहा है। उनके मुताबिक इस साल वैश्विक विकास दर घटकर 0.9 फीसदी पर आ सकती है। उधर गोल्डमैन सैक्स में इकोनॉमिस्ट जैन हैटजियस और उनके साथी अर्थशास्त्रियों ने कहा कि वैश्विक विकास दर घटकर 1.25 फीसदी रह सकती है। दोनों ही समूहों के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी की कोई भी संभावना दूसरी छमाही में यानी, जून के बाद ही है।

सरकार पहले वायरस संक्रमण रोके, उसके बाद बड़ा राहत पैकेज दे

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के आंकड़ों के मुताबिक आगामी मंदी हालांकि 2009 जितनी खतरनाक नहीं होगी, जब वैश्विक विकास दर घटकर 0.8 फीसदी रह गई थी। लेकिन यह मंदी 2001 और 1990 के दशक की शुरुआत में दिखी मंदी से अधिक गहरी होगी। मोर्गन स्टेनले व गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि सरकारों को पहले कोरोना वायरस की रोकथाम का प्रयास करना चाहिए और जब वायरस नियंत्रण में आ जाए, तक आर्थिक तेजी लाने के लिए समुचित राहत पैकेज लानी चाहिए। मोर्गन स्टेनले ने कहा कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के असर और खराब वित्तीय स्थिति के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लगेगा। हालांकि वायरस का संक्रमण कब तक जारी रहेगा और अर्थव्यवस्था पर इसका क्या-क्या असर होगा, इस बारे में अब भी काफी अनिश्चितता बनी हुई है।

चीन में मार्च तिमाही में और बाकी दुनिया में जून तिमाही में दिखेगी आर्थिक मंदी

मोर्गन स्टेनले ने कहा कि चीन में इस साल की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च में गंभीर आर्थिक सुस्ती का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद बाकी दूसरी तिमाही यानी, अप्रैल-जून में दुनिया के बाकी हिस्से में मंदी गहरा सकती है। पहली तिमाही में चीन का जीडीपी 5 फीसदी घट सकता है। इसके बाद धीरे-धीरे वहां विकास होगा। अमेरिका का जीडीपी दूसरी तिमाही में 4 फीसदी घट सकता है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक सबसे खराब हालत यूरोजोन का होगा। पूरे वर्ष के लिए यूरोजोन का जीडीपी 5 फीसदी घट सकता है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक इस साल के आखिर में वैश्विक इकानॉमी में तेज बढ़ोतरी दिखेगी। मोर्गन स्टेनले के मुताबिक हालांकि सरकार के कदमों पर यह निर्भर करता है कि मंदी कितने समय तक बनी रहेगी।